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Prakrutik herbal Chay

प्राकृतिक हर्बल चा

वजन कम होने का कारण कुछ लोगों में ये समस्या genetic ही होती है, यानी उनके घर में सभी लोग दुबले पतले ही होते है वैसे शरीर की पाचन क्रिया सही तरीके से नहीं होने के कारण आपका वजन भी नहीं बढ़ता है शरीर में खून की कमी होने के कारण भी वजन कम होता है मानसिक तनाव के कारण भी वजन कम होता है Hyper thyroid के कारण भी आपके शरिर का वजन नहीं बढ़ पाता है शरीर भरने के उपाय हर दिन 2 बार प्रकतीक हर्बल चाय लेने से आपके शरिर को रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है, तब आप जो भी भोजन करेंगे उसका सार्थक असर आपके शरिर पर पड़ेगा। पाचन तंत्र को बेहत बनाने के लिये लाभदायक होता है, अगर आपका पाचन तंत्र बेहतर होगा तब आप जो भी भोजन करेंगे वो बेहतर तरीके से पाचन होगा और। कुछ दिनों के नियमित प्रयोग से आपको इसका सार्थक असर महिने भर में ही देखने को मिलेगा।

उत्पाद की उपलब्ध पाकिंग ....

Jak Herbal TeaJak Herbal Tea

इस्तेमाल का तरीका ....

1 ग्लास मीठे दूध में 3 - 5 ग्राम (1/1.5 टी-स्पून) दिन में २ बार जैक हर्बल पावडर को पारंपरिक चाय की तरह ही बनाये |

- पहले 4 दिन तक केवल एक ही वक्त ले |
- पाचवे दिन से सुबह-शाम दोनों समय ले |
- शुरुवात में इससे दो-तीन बार दस्त हो सकते है |

अगर आप भी हैं अंडरवेट, तो इस बीमारी के लिए रहें तैयार

1. संक्रमण का खतरा बना रहता है।

2. आसानी से एनीमिया हो सकता है।

3. हृदय संबंधी बीमारी होने का खतरा भी होता है। अंडरवेट होना उतना ही खतरनाक है, जितना कि मोटा होना है। लेकिन हम मोटापे को एक बीमारी के रूप में देखते हैं जबकि पतले होने को अच्छे स्वास्थ्य की निशानी मानते हैं। हकीकत ये है कि पतले होने से भी हमें कई तरह की शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं। इससे पहले कि पतले होने की शारीरिक समस्याओं पर एक नजर डालें, यह जान लेना आवश्यक है कि आखिर अंडरवेट किसे कहते हैं? जिसका वजन औसत वजन से कम होता है। इसे बाॅडी मास इंडेक्स के जरिए भी समझा जा सकता है।

अंडरवेट होने की वजहें

अनुवांशिक

दवाएं

मानसिक समस्या

अंडरवेट होने के रिस्क

इम्युनि सिस्टम कमजोर होना

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आप अंडरवेट हैं, तो इससे आपको इम्युनि सिस्टम प्रभावित होता है। इम्युनि सिस्टम वास्तव में आपकी देखरेख करता है,कई तरह की शारीरिक समस्याओं से बचाता है। असल में शरीर में जब फाॅरेन कंटामिनेंट्स घुसने की कोशिश करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपका इम्युन सिस्टम ही आपकी रक्षा करता है।

हृदय संबंधी बीमारी

आपको यह जानकार हैरानी होगी कि जो लोग बहुत ज्यादा पतले होते हैं यानी जो अंडरवेट होते हैं, उन्हें हृदय संबंधी बीमारी होने का खतरा अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा होता है। हालांकि आमतौर पर यही माना जाता है कि मोटे लोगों में हृदय संबंधी बीमारियां होती हैं। जबकि अंडरवेट भी इससे अछूते नहीं होते।

डायबिटीज

डायबिटीज भी अंडरवेट लोगों को आसानी से अपनी चपेट में ले लेती है। दरअसल जो लोग अंडरवेट होते हैं, वे बहुत चीजें बिना सोचे समझे खा लेते हैं। नतीजतन वे आसानी से डायबिटीज की चपेट में आ जाते हैं। इसके पीछे एक वजह यह भी है कि अंडरवेट लोग कभी भी एक्सरसाइज या स्पोर्ट्स में रुचि नहीं दिखाते। जबकि ऐसा करना उनके स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है।

एनीमिया

इसमें कोई दो राय नहीं है कि जो लोग अंडरवेट होते हैं, उन्हें एनीमिया आसानी से अपनी गिरफ्त में ले लेता है। आपको बताते चलें कि एनीमिया एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें शरीर में रेड ब्लड सेल की प्रोडक्शन कम होती है। अतः जो लोग अंडरवेट होते हैं, वे अन्य लोगों की तुलना में कम होते हैं, नतीजतन उनके शरीर में आवश्यक न्यूट्रिएंट्स नहीं पहुंच पाते ताकि पर्याप्त मात्रा रेड ब्लड सेल प्रोड्यूस हो सके।

अन्य खतरे

बालों का झड़ना
-ओस्टियोपोरोसिस
-गर्भावस्था में जटिलताएं
-मासिक धर्म में समस्याएं
-संक्रमण का खतरा
हर रोज़ एक ही डाइट से हो सकती हैं हेल्थ प्रॉब्लम्स
बॉडी को नहीं मिलते हैं ज़रूरी न्यूट्रिएंट्स
शरीर में ज़रूरी बैक्टीरिया बनने बंद हो जाते हैं
इंफेक्शन से बचना चाहते हैं, तो फास्ट फूड को बिलकुल कहें न-न, शोध

बच्चों की ग्रोथ के लिए ज़रूरी

हमारे शरीर को स्वस्थ रहने के लिए अलग-अलग न्यूट्रिएंट्स की ज़रूरत होती है। लेकिन, अगर हम एक ही तरह का खाना हर रोज़ खाएंगे, तो किसी एक न्यूट्रिएंट की मात्रा शरीर में ज़रूरत से ज़्यादा हो जाएगी, और यह बॉडी के लिए हानिकारक हो सकता है। चाहे बच्चे हों या बड़े, अलग-अलग तरह के पकवान से शरीर को सारे ज़रूरी पोषक तत्व मिलते हैं। खासकर बच्चों की ग्रोथ के लिए तो यह बहुत ज़रूरी है, और अगर बड़े बीमारियों से दूर रहना चाहते हैं, तो भी मील में वैरायटी ज़रूरी है।

डाइजेशन में परेशानी

हर रोज़ एक ही चीज़ खाने से कई लोगों में देखा गया है कि वो उस खाने को ठीक से डाइजेस्ट नहीं कर पाते। यानी उनका मेटाबॉलिज़म वीक हो जाता है, और उन्हें पेट से जुड़ी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। इस दौरान, अगर वो कोई नई चीज़ भी खाते हैं, तो वो ठीक से पचती नहीं और पेट खराब होने के चांस बढ़ जाते हैं। इसलिए, कहते हैं कि एकदम नई चीज़ बहुत ज़्यादा न खाएं। धीरे-धीरे खाएं और एक बार में एक नई चीज़ ही बॉडी को इंट्रोड्यूस करवाएं। यह ख़ासकर उन लोगों के लिए है जो हर रोज़ एक ही डाइट फॉलो करते हैं।

ज़रूरी बैक्टीरिया का विकास नहीं होता

कई लोगों को एक ही तरह का खाना खाने की आदत तब लगती है, जब वो डाइटिंग कर रहे होते हैं। लेकिन लिमिटिड डाइट से गट माइक्रोबायोटा इम्बैलेंस हो सकता है। दरअसल, अगर आप आज कुछ ऐसा खाते हैं, जिससे आपके शरीर को पूरे न्यूट्रिएंट्स न मिले हों, तो अगले दिन कुछ और खाकर उसकी कमी पूरी की जाती है। लेकिन, अगर आप वही चीज़ हर रोज़ खाते हैं, तो गट माइक्रोबायोटा इम्बैलेंस हो सकता है। यानी शरीर में लिमिटिड बैक्टीरिया ही पैदा होते हैं, और बॉडी की पूरी हेल्थ इम्बैलेंस हो जाती है। बैक्टीरिया का विकास शरीर की आंतों या गट में होता है, और एक ही डाइट से कई बैक्टीरिया पैदा ही नहीं होते। अगर आप हर रोज़ हेल्दी खाना खाते हैं, तो भी अपनी डाइट में वैरायटी रखें।