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जानें, क्यों है ब्रेrकफस्ट ज़रूरी?

नियमित तौर पर सुबह का नाश्ता छोडऩे वाले युवाओं को बाद में टाइप टू डायबिटीज़ होने का खतरा अधिक रहता है।सारा दिन ऐक्टिव रहने के लिए भरपूर ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो दिन भर के मील्स से पूरी होती है। उन युवाओं को अपने खानपान का विशेष ख्याल रखना चाहिए, जो जिम जाते हों या खेलकूद वाली गतिविधियों में व्यस्त रहते हों।  यह दिमाग की कार्यप्रणाली के लिए अनिवार्य ग्लूकोज़ के स्तर को रीस्टोर करता है, जिससे व्यक्ति की याददाश्त व एकाग्रता का स्तर सुधरता है।

नियमित तौर पर ब्रेकफस्ट न करने वालों को ब्लड प्रेशर के लो होने का खतरा रहता है, जिससे चक्कर आने या आंखों के आगे अंधेरा छाने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सुबह के नाश्ते में हाई फाइबर और लो कार्बोहाइड्रेट युक्त चीज़ें शामिल करें। इससे दिन भर ऐक्टिव रह सकेंगे और थकान भी काफी कम महसूस होगी। 

पेट भरा होने से चिड़चिड़ापन कम होता है और दिन भर मूड भी ठीक रहता है।

मील को स्किप करने से फैटी लीवर होने की आशंका रहती है।

मील्स में ज़्यादा घंटों का अंतर होने से एसिडिटी या पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। हर तीन घंटे के अंतराल पर कुछ खाते रहने की सलाह दी जाती है। बॉडी को नहीं मिलते हैं ज़रूरी न्यूट्रिएंट्स

शरीर में ज़रूरी बैक्टीरिया बनने बंद हो जाते हैं

1- बच्चों की ग्रोथ के लिए ज़रूरी

हमारे शरीर को स्वस्थ रहने के लिए अलग-अलग न्यूट्रिएंट्स की ज़रूरत होती है। लेकिन, अगर हम एक ही तरह का खाना हर रोज़ खाएंगे, तो किसी एक न्यूट्रिएंट की मात्रा शरीर में ज़रूरत से ज़्यादा हो जाएगी, और यह बॉडी के लिए हानिकारक हो सकता है। चाहे बच्चे हों या बड़े, अलग-अलग तरह के पकवान से शरीर को सारे ज़रूरी पोषक तत्व मिलते हैं। खासकर बच्चों की ग्रोथ के लिए तो यह बहुत ज़रूरी है, और अगर बड़े बीमारियों से दूर रहना चाहते हैं, तो भी मील में वैरायटी ज़रूरी है।

2- डाइजेशन में परेशानी

हर रोज़ एक ही चीज़ खाने से कई लोगों में देखा गया है कि वो उस खाने को ठीक से डाइजेस्ट नहीं कर पाते। यानी उनका मेटाबॉलिज़म वीक हो जाता है, और उन्हें पेट से जुड़ी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। इस दौरान, अगर वो कोई नई चीज़ भी खाते हैं, तो वो ठीक से पचती नहीं और पेट खराब होने के चांस बढ़ जाते हैं। इसलिए, कहते हैं कि एकदम नई चीज़ बहुत ज़्यादा न खाएं। धीरे-धीरे खाएं और एक बार में एक नई चीज़ ही बॉडी को इंट्रोड्यूस करवाएं। यह ख़ासकर उन लोगों के लिए है जो हर रोज़ एक ही डाइट फॉलो करते हैं।

3- ज़रूरी बैक्टीरिया का विकास नहीं होता

कई लोगों को एक ही तरह का खाना खाने की आदत तब लगती है, जब वो डाइटिंग कर रहे होते हैं। लेकिन लिमिटिड डाइट से गट माइक्रोबायोटा इम्बैलेंस हो सकता है। दरअसल, अगर आप आज कुछ ऐसा खाते हैं, जिससे आपके शरीर को पूरे न्यूट्रिएंट्स न मिले हों, तो अगले दिन कुछ और खाकर उसकी कमी पूरी की जाती है। लेकिन, अगर आप वही चीज़ हर रोज़ खाते हैं, तो गट माइक्रोबायोटा इम्बैलेंस हो सकता है। यानी शरीर में लिमिटिड बैक्टीरिया ही पैदा होते हैं, और बॉडी की पूरी हेल्थ इम्बैलेंस हो जाती है। बैक्टीरिया का विकास शरीर की आंतों या गट में होता है, और एक ही डाइट से कई बैक्टीरिया पैदा ही नहीं होते। अगर आप हर रोज़ हेल्दी खाना खाते हैं, तो भी अपनी डाइट में वैरायटी रखें।

4- एलर्जी का चांस

वो लोग जिन्हें खाने से एलर्जी रहती है, अगर एक ही डाइट प्लान फिक्स कर लें, तो उनकी दिक्कत कम नहीं होगी, बल्कि बढ़ेगी। डॉक्टर्स कहते हैं कि ऐसे लोगों को अपनी डाइट में अलग-अलग फूड्स इंट्रोड्यूस करने चाहिए। इससे वो एक ही चीज़ हर रोज़ नहीं, बल्कि कुछ गैप के बाद खाते हैं, और ऐसे में एलर्जी होने के चांस कम हो जाते हैं। इसे कहते हैं रोटेशन डाइट।

5- वज़न कम नहीं होता

एक ही तरह की डाइट कुछ टाइम के बाद बोरिंग लगने लगती है। इसके चलते आपको वज़न कम करने में भी परेशानी हो सकती है। दरअसल, हेल्दी वेट के लिए गट में अलग-अलग बैक्टीरिया का पैदा होना ज़रूरी है, और एक ही बोरिंग डाइट के चलते, ज़्यादा बैक्टीरिया पैदा नहीं हो पाते। इससे कई सीरियस हेल्थ प्रॉब्लम्स भी हो सकती हैं, जैसे की डायबिटीज़। आपको बता दें कि अलग-अलग बैक्टीरिया के हमारी बॉडी में अलग-अलग रोल हैं। कई बैक्टीरिया ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करने में मदद करते हैं, तो कई इंफ्लेमेशन पर चेक रखते हैं।

6- डाइट के अनुसार ही खाएं

मौसम कोई भी हो, आपको डाइट चार्ट के अनुसार ही खाना- पीना चाहिए. अगर आप अपने दिन भर की ज़रूरत के अनुसार कैलोरी लेंगे, तो आपका वज़न कंट्रोल रहेगा और आप दिन भर एनर्जी से भरे रहेंगे।

7- हेल्दी ब्रेकफास्ट ज़रूरी है

सुबह का नाश्ता हमें दिनभर ऊर्जावान बनाए रखता है। इसलिए ज़रूरी है कि नाश्ते में आप प्रोटीन और विटामिन से भरपूर चीज़ें खाएं। इसके लिए आप नाश्ते में इडली, डोसा, उपमा, अंडा, ब्राउन ब्रेड, फ्रूट कस्टर्ड और दूध आदि ले सकते हैं। इसके अलावा अपने ब्रेकफास्ट में फल और सलाद को ज़रूर शामिल करें।

8- दोपहर के खाने में शामिल करें हरी सब्जियां

दोपहर में भूख से थोड़ा कम ही खाएं। दोबारा भूख लगने पर आप जूस या ग्रीन लेबल गोल्ड ले सकते हैं। दोपहर के खाने में छिलके वाली दाल, हरी सब्जियां, रोटी, दही या छाछ लें। खाने के साथ हरी चटनी न सिर्फ खाने के ज़ायके को बढ़ाएगी बल्कि आपकी आपके शरीर की मल्टी विटामिन्स की ज़रुरत को भी पूरा करेगी।

9- हल्का-फुल्का डिनर पाचन के लिए है बेहतर

रात के खाने में आप दलिया, खिचड़ी आदि ले सकते हैं। ये भोजन हल्के होने के साथ-साथ सुपाच्य होते हैं। रात के खाने में मांस, मछली, पनीर जैसे भारी भोजन से परहेज करें। ये आसानी से पच नहीं पाते इसलिए चर्बी (फैट)बढ़ाते हैं।

10- सोने से तुरंत पहले न लें भोजन

रात का खाना सोने से कम से कम 2 घंटे पहले खाना चाहिए। रात के वक़्त आपका शरीर ज़्यादातर आराम की अवस्था में होता है। ऐसे में शरीर ज़्यादा भारी भोजन को नहीं पचा पाता। सोने से पहले गुनगुना दूध, हल्दी डालकर या अदरक के रस के साथ लेना अच्छा होगा।

सुबह उठ कर 2 से 3 ग्लास पानी पीना चाहिए . इसके साथ अपनी प्रकृति के अनुसार कोई ना कोई आयुर्वेदिक चाय लेनी चाहिए . वात पित्त कफ प्रवृत्ति के अनुसार

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